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८ साल बाद ओलंपिक में हम फिर दहाड़ेंगे
विश्व विजेता का इतिहास हम फिर दोहराएंगे,
हाकी का स्वर्णिम दौर जो छूट गया था पीछे
नए जोश से, नए उमंग से वापस लाएंगे,

अभी बस दी है ओलंपिक में दस्तक,
मंजिल तो बहुत दूर है
फ्रांस तो हार गया, अब तोड़ना
बाकियों का गुरूर है,

८ साल से टीस थी जो दिल में, मिलकर मिटाएंगे
हाकी के मैदान पर तिरंगा फहराएंगे
विश्व विजेता का इतिहास हम फिर दोहराएंगे,


जय हिंद
बच गया एंडरसन करके खून हजार...
न्याय मांगती रह गई पीड़ितों की चित्कार...
भ्रष्ट नेताओं ने निभाई एंडरसन से यारी..
भेज दिया स्वदेस उसको रोक के गिरफ्तारी....
ये है भारत देश जहां कण-कण में भ्रष्टाचार...
बच गया एंडरसन करके खून हजार...


२ दिसंबर ८४ की थी वो जहरीली रात....
मौत लगाए बैठी थी सबके जीवन पर घात....
चिमनी से तब निकला एमआईसी का फुंकार...
लील गया कई जानें, कईयों को किया लाचार....


न्याय की राह तकते पीड़ित फिर रहे मारे-मारे....
और अपराधी घूम रहे हैं मस्ती में मतवारे...
ढाई दशक बाद जब आई न्याय की बारी...
तब उजागर हुई नेताओं की सारी भ्रष्टाचारी...
केस कमजोर बनाया ताकि अपराधी चढ़ें न सूली...
लाचार कानून सजा दे पाया वो भी बस मामूली...
धन्य है भारत का कानून, धन्य है सरकार...
भारत के कण-कण में फैला है भ्रष्टाचार...


अमेरिका में छिपा हुआ है एंडरसन फरार...
भारत उसको लाने की जहमत क्यूं उठाए सरकार...
देख रही दुनिया होते न्याय को तार-तार...
बच गया एंडरसन करके खून हजार...
मैं खुद को ढूंढ रहा हूँ,
कौन हूं मैं, क्यां हूं मैं,
ये खुद से पूछ रहा हूँ,
मैं खुद को ढूंढ रहा हूँ...।


आँखों में सपने लिए
घर से निकल पड़ा हूँ,
कहां हैं मेरी राहें, कहां हैं मेरी मंजिल
अपने वजूद को ढूंढ रहा हूँ,
अनसुलझे प्रश्न हैं कई
उनके उत्तर ढूंढ रहा हूँ,
मै खुद को ढूंढ रहा हूं...।

भीड़ से खुद को कैसे अलग दिखाऊं,
जीवन की दौड़ में कहीं पिछड़ न जाऊं,
अपने अंर्तद्वंद्व से लड़ रहा हूँ,
मैं खुद को ढूंढ रहा हूँ...।


हारा हूँ कई बार पर कमजोर नहीं हुआ,
लाख गलतियां की हैं पर अफसोस नहीं हुआ,
बस अब हर कदम पर जीतने की चाह है,
वही मेरी मंजिल वही मेरी राह है,


चाहत को इरादा बनाया है,
कमजोरी को ताकत बनाया है,
पूरे हुए अरमां, मिल गई मंजिल,
अब नई मंजिल के लिए निकल पड़ा हूँ


नई राहें हैं, नई मंजिल हैं,
पर प्रश्न अब भी है वही,
कौन हूँ मैं, क्या हूँ मैं,
ये खुद से पूछ रहा हूँ,
खुद को ढूंढ रहा हूँ,
मैं खुद को ढूंढ रहा हूँ...